चार दिन की मुठभेड़: 16 नक्सली ढेर….
गरियाबंद में चार दिनों तक चली मुठभेड़ में पुलिस ने 16 नक्सलियों को मार गिराया। इनमें से 12 की पहचान हो चुकी है, जिन पर छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में कुल तीन करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। मारे गए नक्सलियों में कुख्यात जयराम उर्फ चलपति , गुड्डू और सत्यम गावड़े , आलोक उर्फ मुन्ना और मन्नू शामिल हैं। इसके अलावा, शंकर, कलमू देवे, मंजू और रिकी भी मारे गए। तीन-तीन लाख के इनामी जैनी उर्फ मासे, रामे ओयम और सुखराम का भी खात्मा हुआ। जयराम का शव लेने के लिए आंध्र प्रदेश से उसका ससुर रायपुर पहुंचा, जिसने अखबारों से मौत की जानकारी मिलने की बात कही।
सुरक्षा बलों की सर्जिकल स्ट्राइक….
आईजी मिश्रा ने बताया कि मुठभेड़ के बाद 16 नक्सलियों के शव बरामद किए गए, जिनमें से 11 की पहचान हो चुकी है। मारे गए नक्सलियों में CCM चलपति, SCM जयराम उर्फ गुड्डू और खतरनाक कमांडर सत्यम गावड़े शामिल हैं। सत्यम गावड़े कोयलीबेड़ा का रहने वाला था और कई सालों से वहां का टॉप कमांडर था। वह नक्सली ऑपरेशनों का कोऑर्डिनेटर था।
आईजी मिश्रा ने बताया कि नक्सली बैठक करने वाले थे, तभी उन्हें घेर लिया गया। नक्सली लोकल ड्रोन से सुरक्षा बलों पर नजर रख रहे थे। ऑपरेशन के लिए जवान डेढ़ से दो दिन का खाना लेकर निकले थे, लेकिन तीन दिन तक भूखे-प्यासे एनकाउंटर चलता रहा। पहाड़ों के बीच भारी फायरिंग के बावजूद जवानों ने साहस दिखाया और सफलता हासिल की। आईजी मिश्रा ने उम्मीद जताई कि 26 मार्च तक माओवाद खत्म हो जाएगा, जिससे बस्तर की तस्वीर बदल जाएगी।
13 महीनों में 240 नक्सली ढेर
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में पिछले 13 महीनों में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ों में 240 नक्सलियों को मार गिराया है। इनमें 25 लाख से 1 करोड़ तक के इनामी नक्सली और शीर्ष कैडर शामिल हैं। बस्तर आईजी सुंदरराज पी. ने बताया कि सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर जैसे सबसे अधिक नक्सल प्रभावित इलाकों में बड़े अभियान चलाए गए।

हाल ही में मारे गए कुख्यात नक्सली नेताओं में एक करोड़ का इनामी जयराम उर्फ चलपती और 50 लाख का इनामी दामोदर शामिल हैं। थुलथुली में 4 अक्टूबर 2024 को हुई सबसे बड़ी मुठभेड़ में 38 नक्सली मारे गए थे।
नक्सलवाद खत्म करने के लिए नई रणनीति
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया है कि, 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद खत्म कर दिया जाएगा। छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान की सफलता का मुख्य कारण संयुक्त अभियान है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर सटीक रणनीति के साथ काम कर रही हैं। सुरक्षाबलों ने नक्सलियों को उनके गढ़ में ही घेरने के लिए नई रणनीति अपनाई है। खासतौर पर दो राज्यों की सीमाओं पर बड़े अभियान चलाए जा रहे हैं, जिससे नक्सलियों की ताकत कमजोर हो रही है।



