छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में सुरक्षाबलों को नक्सलियों के खिलाफ बड़ी सफलता मिली है। कुल्हाड़ी घाट के जंगल में हुई मुठभेड़ में अब तक 14 नक्सलियों के शव बरामद हो चुके हैं, और करीब 1000 जवानों ने 60 नक्सलियों को घेर रखा है। जवानों के पास चार-पाँच ड्रोन हैं, जिनकी मदद से वे नक्सलियों का पता लगा रहे हैं।
मारे गए सभी 14 नक्सलियों के शवों को रायपुर लाया गया है, और इन शवों को मेकाहारा अस्पताल की मोर्चरी में रखा गया है। पोस्टमार्टम के लिए एक 22 डॉक्टरों की टीम बनाई गई है, जिसमें 12 डॉक्टर मोर्चरी में तैनात हैं, और 10 अतिरिक्त डॉक्टरों के अलावा 10 सफाईकर्मी भी सीएमएचओ से मंगवाए गए हैं। यह पहली बार होगा जब इतनी बड़ी संख्या में नक्सलियों के शवों का पोस्टमार्टम एक साथ किया जाएगा। यह घटना सुरक्षाबलों की सफलता और नक्सलियों के खिलाफ चल रहे अभियान की गति को दर्शाती है।

नक्सलियों के शव की जांच: कहीं मौत के साथ न हो विस्फोट का खतरा!”
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में हुई मुठभेड़ में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है, जिसमें एक करोड़ के इनामी नक्सली जयराम उर्फ चलपति सहित 14 नक्सली ढेर हो गए हैं। पुलिस और प्रशासन ने शवों के पोस्टमार्टम को लेकर पूरी तैयारी की है, ताकि कोई रुकावट न आए। मारे गए नक्सलियों में कई सीनियर कमांडर भी शामिल हैं, जिनकी पहचान का काम जारी है। इस मुठभेड़ के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया है।
मेकाहारा अस्पताल की मोर्चरी में पोस्टमार्टम से पहले शवों का पोर्टेबल एक्स-रे किया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि शवों में कोई धातु या विस्फोटक तो नहीं छुपाए गए हैं। यदि एक्स-रे में विस्फोटक या धातु का पता चलता है, तो तुरंत बॉम्ब स्क्वॉड की टीम को बुलाया जाएगा। यह कदम नक्सलियों के शवों में छिपाए गए, खतरों को पहचानने के लिए उठाया गया है।
इस मुठभेड़ में नक्सलियों के प्रमुख नेताओं की मौत से उनके संगठन की कमर टूट गई है, और यह घटना सुरक्षाबलों के लिए एक महत्वपूर्ण सफलता मानी जा रही है। पुलिस और प्रशासन की यह पहल इलाके की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए की गई है, ताकि भविष्य में किसी भी संभावित खतरे से निपटा जा सके।
वही प्रशासन ने ये फैसला सुरक्षा में किसी भी चूक से बचने के लिए लिया है। पिछले अनुभवों से सीखते हुए, माओवादियों की अपनाई जाने वाली रणनीतियों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। “सावधानी से ही सुरक्षा संभव है”—इस सिद्धांत पर रायपुर पुलिस और फॉरेंसिक टीम काम कर रही है।
इस प्रक्रिया से यह भी संकेत मिलता है कि राज्य सरकार नक्सल मुद्दे पर कितनी सतर्क है। यह घटना माओवादियों के उग्र होते मंसूबों और उनकी रणनीतियों पर एक और नज़र डालने का मौका है। जांच के बाद शवों का पोस्टमार्टम किया जाएगा।
छत्तीसगढ़ में पुलिस की बड़ी सफलता…..
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में पुलिस और नक्सलियों के बीच सोमवार को हुई मुठभेड़ में 16 नक्सली मारे गए। इस मुठभेड़ में जयराम उर्फ चलपति, जो कि एक टॉप नक्सल कमांडर था, भी मारा गया। उस पर 1 करोड़ रुपए का इनाम घोषित था। पुलिस ने ओडिशा और छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती क्षेत्रों में संयुक्त ऑपरेशन चलाया, जिसमें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की भी सहायता ली गई। इसके पहले रविवार को छत्तीसगढ़ में दो महिला नक्सलियों को भी मार गिराया गया था।
सुरक्षाबलों ने एनकाउंटर के बाद 16 नक्सलियों के शव बरामद किए हैं, और सर्च ऑपरेशन अब भी जारी है। इस मुठभेड़ में AK-47, SLR, इंसास, और अन्य हथियार भी बरामद किए गए हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, 20 नक्सलियों को मारा गया है और मारे गए नक्सलियों की संख्या और भी बढ़ सकती है। सुरक्षा बलों ने अभियान के दौरान ड्रोन तकनीकी का इस्तेमाल किया, जिससे नक्सलियों की सटीक जानकारी मिली और उन्हें ठिकाने लगाया गया।
इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी मुठभेड़ पर, एक्स (Twitter) पर पोस्ट करते हुए कहा की, “हमारे सुरक्षा बलों ने नक्सल मुक्त भारत के निर्माण की दिशा में बड़ी सफलता हासिल की है।” मुठभेड़ के बाद, सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की योजना बनाई है, जिससे इस संकट का अंत जल्दी हो सके



