
उत्तर प्रदेश स्थित प्रयागराज में 13 जनवरी 2025 से लेकर 26 फरवरी के बीच लगने वाला महाकुंभ में अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। सबसे बड़े धार्मिक पर्व महाकुंभ में देशभर से साधु-संत, योगी आ चुके हैं। कई साधु-संत एकांत में तपस्या में लीन हैं तो कुछ अपनी अनोखे योग, पहनावे और तप के चलते आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इसी के चलते महाकुंभ अनूठे योगियों का मेला बन रहा है।
यूपी के झांसी से आए एक संन्यासी अपने हठयोग के लिए चर्चित हैं। श्री शंभू पंच दशनाम नाम आवाहन अखाड़े के संन्यासी महंत महाकाल गिरी ने पिछले 9 साल से अपना बायां हाथ ऊपर उठा रखा है ताकि लोक कल्याण, गो हत्या रोकने और देश के हित के लिए अपना योगदान दे सकें।
गीतानंद गिरी महाराज अब रुद्राक्ष वाले बाबा हैं। उन्होंने 2019 के अर्थ कुम्भ में सवा लाख रुद्राक्ष धारण करने का संकल्प लिया, जो अब बढ़कर सवा दो लाख हो चुका है। 55 वर्ष के बाबा 48 किलो के रुद्राक्ष धारण कर चुके हैं। वे रोज सुबह से 12 घंटे इसे सिर पर रखते हैं और शिवलिंग के दर्शन के बाद ही उतरते हैं पर दर्शन न हो सके तो रुद्राक्ष सिर पर ही रहेंगे। वे श्री शंभू पंचदशनाम आवाहन अखाड़ा के संन्यासी और श्रीमहंत सचिव हैं। वे कहते हैं कि अगले अर्द्ध कुम्भ में संकल्प पूरा होने पर रुद्राक्ष त्रिवेणी में प्रवाहित करेंगे।
बजाज एवेंजर से चलने वाले बाबा बवंडर देवी-देवताओं के चित्रों की प्रतिष्ठा को लेकर अभियान चला रहे हैं। अपनी हाइटेक बाइक को वे धर्म रथ कहते हैं। इसी से चलते हैं, इसी पर सोते हैं, इसी पर तपस्या करते हैं। दीक्षा गुरु से उन्हें बवंडर बाबा का नाम दिया था।
अटल अखाड़े के बाबा भागीरथी गिरि खड़ेश्वरी 3 साल से लगातार 24 घंटे एक पैर पर खड़े रहते हैं। झूले का सहारा लेकर सो जाते हैं। उनका संकल्प है कि जब तक महिलाओं के खिलाफ अत्याचार, गोहत्या और आतंकवाद खत्म नहीं होता वे तपस्या में लीन रहेंगे। उनका लक्ष्य हिंदुओं की एकता, गो हत्या बंद कराना और विश्व कल्याण है।
इसके अलावा, इस महाकुंभ में कहीं 32 साल से स्नान न करने वाले छोटू बाबा आ रहे हैं तो कहीं 20 किलो लोहे की चाबी साथ लेकर चलने वाला एक कबीरा बाबा। कबीरा बाबा का कहना है कि यह चाभी जीवन और अध्यात्म का प्रतीक है।
एक ऐसे बाबा भी महाकुंभ में पहुंचे हैं जो साल 1972 मॉडल की एंबेसडर से चलते रहे हैं। वह बीते 35 साल से एक ही कार की सवारी कर रहे हैं। महंत राज गिरी नागा बाबा को एंबेसडर बाबा के नाम से भी जाना जाता है। बाबा कहते हैं कि ये कार मेरी मां जैसी है और वह इसी गाड़ी में रहते हैं।
महाकुंभ में सिर पर फसल उगाने वाले अनाज बाबा की तस्वीरे भी इंटरनेट पर खूब शेयर की जा रही है। इनकी विशेषता यह है कि इन्होंने पिछले 5 सालों से अपने सिर पर फसल उगाई हुई है। इसके अलावा, 14 साल से एक हाथ उठाए हुए राधे पुरी बाबा भी 2025 महाकुंभ में पहुंचे हैं। 2025 महाकुंभ में श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी की छावनी प्रवेश यात्रा में बांसुरी बजाने वाले बाबा भी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। महाकुंभ में महामंडलेश्वर कंप्यूटर बाबा का आगमन भी हो चुका है। वह अहिल्या नगर इंदौर खालसा के महामंडलेश्वर है। घोड़े वाला बाबा भी 2025 महाकुंभ के लिए प्रयागराज पहुंचे हुए हैं। विजयपुरी बाबा, घोड़े वाले बाबा के नाम से मशहूर हैं। 7 फीट लंबी जटा वाले महंत मंगलानंद सरस्वती भी महाकुंभ 2025 में भक्तों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।


