राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध विभाग को परमाणु हथियारों की टेस्टिंग तुरंत शुरू करने का आदेश दिया, हालांकि व्हाइट हाउस और पेंटागन की आधिकारिक प्रतिक्रिया अब तक नहीं आई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को घोषणा की कि उन्होंने देश के डिपार्टमेंट ऑफ वॉर (पूर्व में डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस) को परमाणु हथियारों के परीक्षण शुरू करने का आदेश दिया है। ट्रंप का यह फैसला रूस और अन्य देशों द्वारा हाल ही में किए गए परमाणु परीक्षणों के बाद आया है। उन्होंने कहा कि यह कदम वैश्विक शक्ति संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
विनाश से घृणा, पर विकल्प नहीं — ट्रंप
ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने बताया कि अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने अमेरिका के सभी परमाणु हथियारों का नवीनीकरण कराया था। उन्होंने लिखा कि अमेरिका के पास आज किसी भी देश से अधिक परमाणु हथियार हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि भले ही उन्हें इन हथियारों की विनाशकारी शक्ति से घृणा है, लेकिन मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात में उनके पास परीक्षण शुरू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। हालांकि, इस फैसले पर अब तक व्हाइट हाउस और पेंटागन की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
रूस-चीन से बराबरी की तैयारी
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि परमाणु शक्ति के मामले में रूस दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है, जबकि चीन अभी काफी पीछे है, लेकिन आने वाले पांच वर्षों में वह बराबरी पर पहुंच सकता है। ट्रंप के अनुसार, जब अन्य देश लगातार अपने परमाणु कार्यक्रमों का परीक्षण कर रहे हैं, तो अमेरिका को भी समान आधार पर अपने हथियारों की टेस्टिंग शुरू करनी चाहिए। इसी कारण उन्होंने डिपार्टमेंट ऑफ वॉर को तुरंत प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है।
बढ़ी वैश्विक चिंता
ट्रंप का यह फैसला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि अमेरिका ने 1992 के बाद से कोई परमाणु परीक्षण नहीं किया है। अमेरिका कॉम्प्रिहेंसिव न्यूक्लियर-टेस्ट-बैन ट्रीटी का हिस्सा है, जो सभी परमाणु विस्फोटक परीक्षणों पर रोक लगाती है, हालांकि उसने इस संधि को औपचारिक रूप से मंजूर नहीं किया। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका वास्तव में परीक्षण शुरू करता है, तो इससे वैश्विक सुरक्षा संतुलन बिगड़ सकता है और रूस, चीन सहित अन्य देशों के बीच नई हथियार होड़ की शुरुआत हो सकती है।


