जीतू पटवारी ने सरकार की शराब नीति को महिला असुरक्षा, सामाजिक विघटन और बढ़ती मौतों के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए न्यायिक जांच और शराब नियंत्रण की मांग की।

मध्य प्रदेश में पिछले दस वर्षों में नकली और जहरीली शराब के कारण 1330 से ज्यादा लोगों की मौतों ने सरकार की शराब नीति और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि इन मौतों के पीछे सरकार की “शराब उदारीकरण नीति” जिम्मेदार है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस नीति ने शराब माफियाओं को खुली छूट दे दी है, जिससे सबसे ज्यादा नुकसान महिलाओं और युवाओं को हो रहा है।
“सरकार माफिया के साथ, जनता बेसहारा”
पटवारी ने 2024-25 में रतलाम, मंदसौर, इंदौर और उज्जैन जैसे जिलों में नकली शराब से हुई मौतों का जिक्र करते हुए कहा कि यह सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि उजड़े हुए परिवारों की कहानियां हैं। उन्होंने कहा, “बीते कुछ वर्षों में शराब पीने वालों की संख्या 50% तक बढ़ गई है, क्योंकि सरकार ने शराब को हर गली-मोहल्ले तक पहुंचा दिया है।” पटवारी ने मांग की है कि इन मौतों की न्यायिक जांच कराई जाए और शराब माफियाओं को राजनीतिक संरक्षण देना तुरंत बंद हो।
समाज पर गहरा असर
NFHS-5 रिपोर्ट का हवाला देते हुए जीतू पटवारी ने बताया कि राज्य में 10.2% महिलाएं तंबाकू और 1% महिलाएं शराब का सेवन करती हैं। उन्होंने इसे समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी बताया और कहा कि शराब अब सिर्फ पुरुषों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका दुष्प्रभाव महिलाओं और युवाओं पर भी दिखने लगा है। पटवारी ने आरोप लगाया कि सरकार की लापरवाह शराब नीति घरेलू हिंसा, अपराध, वित्तीय बर्बादी और सामाजिक विघटन को बढ़ावा दे रही है।
धार्मिक स्थलों पर शराब की बिक्री
पटवारी ने कहा कि सरकार ने शराबबंदी वाले 19 शहरों और धार्मिक स्थलों तक को नहीं बख्शा, जहां अब खुलेआम महंगी शराब बेची जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजधानी समेत राज्य के बड़े शहरों में स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और मंदिरों के 100 मीटर के दायरे में शराब दुकानें खुली हुई हैं, जिससे महिलाओं में असुरक्षा का भाव गहराता जा रहा है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश पहले से ही महिला अपराधों में देश में शीर्ष पर है और सरकार की नीतियों ने महिलाओं के लिए वातावरण और असुरक्षित बना दिया है।


