केंद्र सरकार ने “यूनिफाइड वक्फ मैनेजमेंट, एम्पावरमेंट, एफिशिएंसी एंड डेवलपमेंट रूल्स, 2025” का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।

ये नए नियम वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण, पंजीकरण, लेखा परीक्षण (ऑडिट) और प्रभावी प्रबंधन के उद्देश्य से बनाए गए हैं। अब देशभर की सभी वक्फ संपत्तियों का विवरण एक केंद्रीकृत पोर्टल और डेटाबेस में दर्ज होगा, जिससे पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर नियंत्रण संभव हो सकेगा। यह कदम वक्फ प्रबंधन में तकनीकी सुधार और संस्थागत सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
डिजिटल पोर्टल से होगा रजिस्ट्रेशन और रिकॉर्ड अपलोड
नए नियमों के तहत वक्फ संपत्तियों के प्रबंधक (मुतवल्ली) को OTP आधारित लॉगिन के माध्यम से पोर्टल पर रजिस्टर करना होगा। इसके बाद वे वक्फ और उसकी संबंधित संपत्तियों की पूरी जानकारी अपलोड कर सकेंगे। इस पोर्टल पर फॉर्म-4 में नई संपत्तियों का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है, जिसे किसी भी नई वक्फ संपत्ति के निर्माण के 90 दिनों के भीतर पूरा करना होगा। वक्फ बोर्ड भी पोर्टल पर फॉर्म-5 के माध्यम से वक्फ रजिस्टर को बनाए रखेगा, जिससे हर स्तर पर निगरानी और सूचना तक पहुँच सुलभ हो सके।
8 अप्रैल 2025 से लागू होंगे नए नियम
यह पूरा ढांचा वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के अंतर्गत तैयार किया गया है, जिसे 8 अप्रैल 2025 से प्रभाव में लाया गया है। इन नियमों के तहत वक्फ बोर्डों को ऑडिट रिपोर्ट, लेखा-जोखा, आदेश और अन्य प्रशासनिक जानकारी पोर्टल पर सार्वजनिक करनी होगी। इससे न सिर्फ वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और सही उपयोग सुनिश्चित होगा, बल्कि मुतवल्ली और आम नागरिकों के बीच पारदर्शिता और विश्वास भी मजबूत होगा। सरकार का यह प्रयास वक्फ संसाधनों के अधिकतम और न्यायसंगत उपयोग की दिशा में एक सार्थक पहल मानी जा रही है।
केंद्र और राज्यों की भूमिका स्पष्ट
वक्फ प्रबंधन के नए नियमों में केंद्र और राज्य सरकारों की जिम्मेदारियां स्पष्ट कर दी गई हैं। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के अंतर्गत वक्फ डिवीजन के प्रभारी संयुक्त सचिव इस केंद्रीकृत पोर्टल और डेटाबेस की निगरानी और नियंत्रण के लिए उत्तरदायी होंगे। वहीं, प्रत्येक राज्य को संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी को नोडल अधिकारी के रूप में नियुक्त करना अनिवार्य होगा। केंद्र सरकार की सलाह से एक सेंट्रलाइज्ड सपोर्ट यूनिट की भी स्थापना की जाएगी, जो तकनीकी और प्रशासनिक सहायता प्रदान करेगी।
रीयल-टाइम मॉनिटरिंग और पारदर्शिता का नया युग
इस नए पोर्टल में रीयल-टाइम मॉनिटरिंग की सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण, प्रशासन, वित्तीय लेन-देन, कोर्ट केस, विवादों के समाधान, विकास योजनाओं और सर्वे संबंधी जानकारियों की निगरानी संभव होगी। सभी राज्य सरकारों को 90 दिनों के भीतर वक्फ संपत्तियों की सूची और विवरण पोर्टल पर अपलोड करना होगा, और विलंब की स्थिति में कारण सहित अधिकतम 90 दिन की अतिरिक्त समय सीमा दी जाएगी। यह व्यापक कानूनी और तकनीकी ढांचा 2 अप्रैल को लोकसभा और 3 अप्रैल को राज्यसभा में गहन बहस के बाद पारित किया गया था, जिसे 5 अप्रैल को राष्ट्रपति की मंजूरी और 8 अप्रैल से देशभर में लागू किया गया। यह वक्फ प्रबंधन को पारदर्शी, जवाबदेह और सशक्त बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।


