सीएम मोहन यादव ने निष्ठावान नेता हेमंत खंडेलवाल को प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए आगे बढ़ाया, जिन्हें जीत मिली।

मध्य प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष पद पर हेमंत खंडेलवाल का निर्विरोध निर्वाचन न सिर्फ एक सहज प्रशासनिक प्रक्रिया रही, बल्कि एक मजबूत राजनीतिक संदेश भी बन गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की रणनीति ने गुटबाजी करने वालों को शांत कर दिया और पार्टी की एकजुटता को प्राथमिकता दी। खंडेलवाल की नियुक्ति से यह भी साफ हो गया कि अब नेतृत्व उन्हीं को मिलेगा जो संगठन के प्रति निष्ठावान हैं और जमीनी स्तर पर काम करते रहे हैं।
जातिवाद-क्षेत्रवाद को फिर मिला झटका
एमपी जैसे राज्य में, जहां सात राज्यों की सीमाएं लगती हैं, बाहरी प्रभाव और जातीय समीकरणों की राजनीति बार-बार पनपने की कोशिश करती है, वहीं बीजेपी ने फिर साबित किया कि यहां नीति-निर्माण दिल्ली या अन्य राज्यों के प्रभाव से नहीं चलता। इस बार भी तमाम अटकलों को दरकिनार करते हुए पार्टी ने न तो जाति, क्षेत्र या लिंग को आधार बनाया, बल्कि निष्ठा और योग्यता को प्राथमिकता दी। खंडेलवाल की ताजपोशी ने यह संदेश मजबूत किया कि एमपी बीजेपी में संगठन सर्वोपरि है।
संगठन और विचारधारा की एकजुटता
मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा हेमंत खंडेलवाल को आगे बढ़ाने के पीछे संगठनात्मक सोच और विचारधारा की समानता प्रमुख वजह रही। दोनों नेताओं की पृष्ठभूमि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ी है और उन्होंने छात्र राजनीति से लेकर विधानसभा तक पार्टी के लिए निरंतर कार्य किया है। खंडेलवाल की साफ-सुथरी छवि, पार्टी और विचारधारा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता, और लंबे समय तक संगठन में निभाई गई अहम भूमिकाओं ने उन्हें सीएम की स्वाभाविक पसंद बना दिया। मोहन यादव ने जिस तरह से खंडेलवाल के नाम को सर्वसम्मति से निर्वाचित कराने में सक्रिय भूमिका निभाई, वह इस गहरी राजनीतिक समझदारी और भरोसे को दर्शाता है।
सरकार और संगठन में तालमेल की रणनीति
हेमंत खंडेलवाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाना सिर्फ एक राजनीतिक नियुक्ति नहीं, बल्कि संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की रणनीतिक चाल भी है। बतौर कोषाध्यक्ष, खंडेलवाल की कार्यशैली से मोहन यादव पहले ही प्रभावित थे और उनके बीच विश्वास और संवाद की मजबूत नींव बन चुकी थी। यही पारस्परिक समझ और व्यावहारिक सोच पार्टी को स्थायित्व देने में मदद करेगी। यह चयन इस बात का भी संकेत है कि अब मध्य प्रदेश बीजेपी में नेतृत्व का पैमाना निष्ठा, योग्यता और व्यवहारिक समन्वय होगा — न कि जातीय या क्षेत्रीय समीकरण।


